3. कानूनी पुस्तकालय और निजी कानूनी पोर्टल्स
इस अधिनियम की गहराई में जाने से पहले इसकी संरचना को समझना आवश्यक है। अधिनियम को कई भागों (पार्ट्स) और अध्यायों में बांटा गया है, जिनमें से प्रमुख इस प्रकार हैं:
यह अधिनियम 1 जुलाई 1914 को लागू हुआ था. इसका उद्देश्य बिहार और उड़ीसा में सरकारी मांग या लोक मांग को वसूलने की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाना था।
अधिनियम का इतिहास और पृष्ठभूमि
1. सर्टिफिकेट दाखिल करना (Filing of Certificate)
यदि आप इस अधिनियम की हिंदी PDF प्रति खोज रहे हैं, तो निम्नलिखित स्रोत सबसे अधिक विश्वसनीय हैं:
नगर निगमों, जिला परिषदों या अन्य वैधानिक निकायों का बकाया धन।